मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य के बाद अरुण यादव?

शिवकुमार विवेक की खास रिपोर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस का संकट लगातार गहरा रहा है और अब प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव के साथ सात-आठ विधायकों के भाजपा में जाने की चर्चा से हाईकमान परेशान है। कांग्रेस विधायकों के जाने के सिलसिले को रोकने में दोनों शीर्ष बुज़ुर्ग नेता-कमलनाथ और दिग्विजय सिंह लाचार नजर आ रहे हैं। राजनीतिक क्षेत्रों में कमलनाथ के संकटमोचक दिग्विजय सिंह खुद ही संकट की वजह बताए जा रहे हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ २२ कांग्रेस विधायकों के जाने और दो अन्य विधायकों के इस्तीफ़ा देने के बाद भी विधायकों का भाजपा की तरफ कूच करने का सिलसिला थमा नहीं है। पिछले एक पखवाड़े मे कांग्रेस के तीन और विधायक अलग-अलग त्यागपत्र दे चुके हैं।

लेकिन हाल में प्रदेश के मालवा-निमाड़ क्षेत्र से आने वाले दो कांग्रेस विधायकों के इस्तीफ़े ने पार्टी मे घबराहट पैदा कर दी है। ये विधायक प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष व पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण यादव के समर्थक हैं। समझा जाता है कि उन्होंने यह क़दम यादव की सहमति से उठाया है और अब चर्चा यह है कि खुद अरुण भाजपा से बातचीत चला रहे हैं। उनके अलावा आठ और विधायकों के सूत्र भाजपा से जुड़े हैं।

अरुण यादव ने हालाँकि शुक्रवार को भोपाल में प्रेस कांफ्रेंस करके इसका खंडन कर कहा कि वे मरते दम तक कांग्रेस में रहेंगे। लेकिन उन्हीं के इलाके के एक और पुराने कांग्रेसी ख़ानदान से आए मुखर निर्दलीय विधायक ठाकुर शेर सिंह उर्फ़ शेरा ने कहा कि वे पहले समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और उप्र से राज्यसभा उम्मीदवार बनने जा रहे थे। यादव ने इस पर इतना ही कहा कि उनके अखिलेश यादव से संबंध हैं।

ग़ौरतलब है कि अरुण यादव युवा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे और तब दिग्विजय सिंह उन्हें ओबीसी के भावी नेता के रूप में खड़ा करने के लिए आग लाए। अरुण के पिता पूर्व उपमुख्यमंत्री सुभाष यादव के निधन के बाद दिग्गी ने उन पर हाथ रखा था लेकिन अब वे उन्हीं से नाराज़ हैं। इधर पार्टी में कुछ वरिष्ठ नेता उन्हें सचिन पायलट की तरह नकारा बताने पर तुले हैं। उनकी तरह पार्टी में दिग्विजय सिंह के खिलाफ रहने वालों की संख्या काफी है।दिग्विजय के भाई लक्ष्मण सिंह ने कह दिया है- कमलनाथ इस पर चिंतन करें।

1 COMMENT

  1. बिल्कुल सही है. कांग्रेस में हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं क्षत्रप अब रहे नहीं और जो कांग्रेस चला रहे हैं उनकी हालत खस्ता है, चाहे प्रदेश स्तर पर देखें या राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस में चला-चली की बेला चल रही है।

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