मप्र में पूर्व मुख्यमंत्रियों के पुत्र फ़ाइनल लांचिंग को तैयार

भोपाल से शिवकुमार विवेक

मध्यप्रदेश में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के नए अवतार मैदान ठोकने लगे हैं। कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ ने ‘मैं करूँगा उपचुनाव का नेतृत्व’ कहकर प्रदेश में कांग्रेस की बुज़ुर्ग राजनीति में ख़लल पैदा कर दिया है। इसके पूर्व इसी महीने के पहले सप्ताह में दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन के समर्थक उन्हें प्रदेश का भावी मुख्यमंत्री बताने वाले पोस्टर लगाकर अपना दावा रख चुके हैं। भविष्य के नेतृत्व संग्राम के इन दो कोणों के बीच तीसरी कोण भी चुप नहीं है। प्रदेश कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष जीतू पटवारी के समर्थक लगातार नारे लगा रहे हैं-न राजा, न व्यापारी-अबकी बार जीतू पटवारी।

प्रदेश विधानसभा में २३० सीटें हैं जिनमें से अगले कुछ महीनों में २७ सीटों पर चुनाव होना है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने के बाद इनमें कांग्रेस अभियान का नेतृत्व कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के हाथों में है। लेकिन पार्टी में अब नए और युवा नेतृत्व को आगे लाने की बेचैनी भी दिख रही है। हालाँकि कमलनाथ और दिग्विजय अपने-अपने बेटों को पहले ही प्रमोट कर रहे थे लेकिन सचिन पायलट प्रकरण के बाद इस मामले में निर्णायक क़दम बढ़ाने का दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा, वर्ष २०२३ में होने वाले विधानसभा चुनाव में कमलनाथ और दिग्विजय रिटायर होने की स्थिति में पहुँच जाएँगे जिसके कारण बेटों को स्थापित करने का यही सबसे सही समय माना जा रहा है।

दिग्विजय सिंह और कमलनाथ अगले चुनाव तक ७६ साल की उम्र पार कर जाएँगे। दोनों के बेटे इस समय क्रमश: ३४ व ४६ वर्ष के हैं। कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ पिछले लोकसभा चुनाव में पिता की छिन्दवाड़ा सीट से पहली बार सांसद बने हैं जबकि दिग्विजय ने अपने पुत्र जयवर्धन को कमलनाथ मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बनवा दिया था। यहाँ ४६ वर्षीय जीतू पटवारी की बात कर लें जो किसी बड़े पिता के बेटे नहीं हैं लेकिन प्रदेश की राजनीति में इन दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों से ज्यादा ज़मीनी नेता हैं। कमलनाथ के पुत्र जहाँ कलकत्ता में जन्म लेकर दून स्कूल और बाद में बोस्टन (अमेरिका) में पढ़े और दिग्विजय सिंह के पुत्र की पढ़ाई भी दून के बाद अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में हुई तो जीतू की स्कूली व उच्च शिक्षा इंदौर में हुई। जयवर्धन ने हालाँकि मंत्री के रूप में औसत काम किया जबकि नकुलनाथ अपने संसदीय क्षेत्र से ही बाहर नहीं निकल सके। वे प्रदेश से कांग्रेस टिकट पर जीतने वाले एकमात्र सांसद थे लेकिन लगभग साढ़े तीन दशक तक कमलनाथ के प्रतिनिधित्व वाली सीट पर महज़ ३७ हजार वोटों से जीत सके।

तीनों युवा नेताओं की दावेदारियाँ तब मुखर हो रही हैं जब आगामी महीनों में प्रदेश में उपचुनाव होने हैं। नकुलनाथ ने बक़ायदा वीडियो जारी करके कहा-‘मैं उपचुनाव में युवाओं का नेतृत्व करूँगा। जयवर्धन व जीतू मेरे साथ अपने-अपने क्षेत्र में काम करेंगे।’ यह नकुल का बड़बोलापन है क्योंकि जीतू उम्र में, तो जयवर्धन अनुभव में उनसे वरिष्ठ हैं। खुद कांग्रेस के नेता आपसी बातचीत में यह पूछ रहे हैं कि नकुल को प्रदेश के युवाओं की कमान किसने सौंप दी? यदि पिता ऐसा करना चाहते हैं तो यह नकुल को लादना ही होगा। वैसे नकुल और जय-दोनों के पिता इस उपचुनाव से अगले विधानसभा चुनाव तक यानी अगले तीन साल दोनों को माँजने का व्यक्त मानकर काम कर रहे हैं। यानी यह काल उनकी फ़ाइनल लांचिंग का है। ऐसे में जीतू को खुद को तैयार करना होगा। वैसे मैदानी लड़ाई में वे ही सबसे आगे दिखाई देते हैं।

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