Monday, November 30, 2020

भाजपा के इशारे पर चुनाव टालने की बात कर रहे हैं चिराग ?

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संजीव पांडेय

राष्ट्रीय जनता दल के बाद लोकजनशक्ति पार्टी ने भी बिहार विधानसभा चुनाव टालने की मांग की है। एलजेपी के चिराग पासवान ने चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आठ करोड़ मतदाताओं को सामाजिक दूरी बनाकर वोट डालने में मुश्किल आएगी। इससे कोरोना और फैल  सकता है। चिराग पासवान के अनुसार राजनीतिक दलों के लिए चुनाव प्रचार करना भी मुश्किल होगा। इससे पहले राष्ट्रीय जनता दल ने भी चुनाव टालने की मांग की थी। दरअसल चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को 31 जुलाई तक अपना जवाब आय़ोग के पास देने का समय दिया था। दरअसल एलजेपी के चुनाव टालने की मांग से सबसे ज्यादा भाजपा खुश है। क्योंकि, राज्य सरकार की मियाद पूरा होते ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाएगा। इसके बाद नीतीश कुमार पर लगाम कसने में भाजपा को मदद मिलेगी।

दरअसल अंदरखाते तो भाजपा भी चुनाव टालना ही चाहती है। लेकिन, गठबंधन में होने के कारण खुले तौर पर भाजपा नीतीश कुमार की इच्छा के खिलाफ नहीं जा सकती। नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड बिहार विधानसभा चुनाव नियत समय पर एक ही दिन में करवाने की मांग कर चुकी है। लेकिन, सच्चाई यह है कि अंदर खाते भाजपा भी चाहती है कि बिहार में चुनाव टाल दिया जाए। बिहार में राष्ट्रपति शासन लग जाए। कोरोना का प्रकोप दूर हो जाए। ताकि, नाराज जनता का गुस्सा दूर हो। हालांकि, चुनाव आयोग कितना स्वतंत्र है, सारा देश जानता है। लेकिन, उधर नीतीश भी मंझे हुए खिलाड़ी हैं। उन्हें पता है कि चिराग पासवान अपनी मर्जी से कुछ नहीं बोल रहे हैं। नीतीश को यह भी पता है कि वे अगर खुद राजद के साथ गठबंधन को तोड़ भाजपा के साथ मिलकर बिहार में दुबारा सरकार बना सकते है तो भविष्य में भाजपा भी राजद के साथ गठबंधन कर बिहार में सरकार बना सकती है। इसलिए नीतीश कुमार बिहार में समय पर चुनाव चाहते है। नीतीश उन अफवाहों को भी खासी गंभीरता से लेते हैं, जिसका कुछ राजनीतिक अर्थ निकलता है। मसलन बिहार में अक्सर यह अफवाह उड़ती रहती है कि राजद नेता तेजस्वी यादव भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के जरिए भाजपा आलाकमान के संपर्क में हैं।

जमीन पर भाजपा कार्यकर्ताओं को प्रचार में मुश्किल हो रही है। क्योंकि, जनता का गुस्सा उन्हें झेलना पड़ रहा है। भाजपा के नेता जनता के निशाने पर इसलिए भी हैं कि अचानक राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से बिहार के लगभग एक करोड़ प्रवासी मजदूर प्रभावित हुए हैं। उन्हें पैदल बिहार की तरफ भागना पड़ा। आज वे रोजी रोटी के लिए परेशान हैं। दरअसल बिहार में कोरोना ने जनता को बेदम कर दिया है। सरकार लाचार है। सुशासन और विकास के लंबे दावों की पोल खुल गई है। अस्पतालों में इलाज नहीं हो पा रहा है। स्वास्थ्य सेवाएं बेदम हो गई हैं। संपन्न तबके को भी काफी सिफारिश के बाद कोरोना का इलाज मिल रहा है। हालात इतने बदतर हो गए कि कई डॉक्टर कोरोना की चपेट में हैं। डॉक्टरों और अधिकारियों का इलाज भी मुश्किल से हो रहा। कई डॉक्टरों की मौत कोरोना से हो गई है। राज्य में चुनाव लड़ाने और जिताने के लिए जिम्मेदार कई नेता कोरोना के डर से दिल्ली में ही बैठ गए। क्योंकि दिल्ली में इलाज की बेहतर व्यवस्था है। अगर कोरोना हुआ तो इलाज अच्छा मिलेगा। उधर बिहार की जनता को उनके हाल पर मरने के लिए छोड़ दिया गया है। राज्य सरकार अपनी विफलता की गाज अधिकारियों पर गिरा रही है। कोरोना से निपटने में विफल मुख्यमंत्री स्वास्थ्य विभाग के दो प्रधान स्वास्थ्य सचिव बदल चुके हैं। सरकार अपनी विफलता छुपाने के लिए अधिकारियों को निशाना बना रही हैं। अधिकारियों का तर्क है कि बदहाल स्वास्थ्य सेवा को एक दिन में स्वास्थ्य सचिव ठीक नहीं कर सकते। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग अवैध वसूली का अड्डा बन चुका है। नीचे से ऊपर तक पैसा जाता है। अगर पैसे के लेनदेन की संस्कृति पर सरकार पहले ही नकेल कस देती तो बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी बदहाल नहीं होती?

कोरोना और बाढ़ ने एनडीए गठबंधन की सरकार का ग्राफ एकाएक नीचे कर दिया है। जनता के विरोध के डर से भाजपा वर्चुअल रैली कर रही है। दरअसल कुछ जगहों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रचार की कोशिश की। उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। उधऱ नीतीश कुमार के सामने दोहरी समस्या है। उन्हें अच्छी तरह से पता है कि जनता नाराज है। लेकिन, अगर चुनाव आयोग ने चुनाव टाल दिया तो बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाएगा। वैसे में सारा तंत्र भाजपा के पास चला जाएगा। इससे सबसे ज्यादा नुकसान नीतीश कुमार को होगा। नीतीश कुमार को यह पता है कि चिराग पासवान का हर कदम इस समय भाजपा के इशारे पर उठ रहा है। लालू यादव के बेटे से उनका कोई सीधा संपर्क नहीं है। ये महज अफवाह है। लालू यादव के बेटे तेजस्वी से उनका सीधा संपर्क अगर होगा तो भाजपा के माध्यम से ही होगा। क्योंकि, चिराग पासवान और उनके पिता दिल्ली की सत्ता की भागीदारी किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ सकते। दिल्ली में किसी भी विचारधारा की पार्टी की सरकार हो रामविलास पासवान मंत्री बनते रहे हैं।   

बिहार में इस समय आम जनता लालू काल का जंगल राज भूल गई है। यहां तक की लालू के घोर विरोधी मतदाता भी लालू के जंगल राज कोरोना के कारण भूल रहे हैं। आम लोगों को अब कोरोना काल का जंगल राज सामने दिख रहा है। कोरोना काल में सताधारी दल एक्सपोज हुआ है। लोग कोरोना संकट से जूझ रहे है, इधर सताधारी गठबंधन ने चुनाव प्रचार शुरू कर दिया। नेता वर्चुअल रैली कर रहे हैं, लेकिन जब कोरोना से ग्रसित मरीज या उनका परिवार भाजपा, जद यू के मंत्री, नेता, विधायक, सांसद को फोन करते हैं, तो उनका फोन नहीं उठता। नेताओं की बेरूखी की कई शिकायतें सामने आई हैं। लोग परेशान है। जुलाई के पहले पखवाड़े में प्रदेश भाजपा कार्यालय में चुनावी तैयारी को लेकर बैठक बुलाई गई थी। बैठक में कोरोना विस्फोट हो गया। कई भाजपा के वरिष्ठ नेता कोरोना से संक्रमति हो गए। जिलों से आए नेता भी कोरोना से ग्रस्त हो गए। उन्हें कोरोना संक्रमित होने के बाद किसी ने पूछा तक नहीं। 

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