Tuesday, March 9, 2021

उत्तराखंड सरकार का जादू : कोरोना के राज्य से पांव उखड़े

Must read

दो नेताओं के बीच घूमती बिहार की दलित राजनीति

संजीव पांडेय बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने खेमा बदल लिया है। इस साल प्रस्तावित बिहार...

अयोध्या जा रहे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय लल्लू को बाराबंकी में हिरासत में लिया

बाराबंकी। अयोध्या में किसानों से मिलने जा रहे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को बाराबंकी में हिरासत में ले...

त्रिवेंद्र की कोशिश पर पार्टी ने फेरा पानी

देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अनिच्छा के बावजूद भाजपा संगठन ने जिस तरह से रुड़की के विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन...

कांग्रेस के असंतुष्टों की मंशा पर उठते सवालों के जवाब भी जरूरी हैं

बगावती तेवर में सता की लालसा है। सत्ता का वियोग है। जिन्हे निशाने पर लिया गया है वे भी लोकतांत्रिक नहीं हैं। जनता...

देहरादून। अभी न तो कोई वैक्सीन ही आई है और न ही कोरोना की कोई नई दवा। सरकारों ने भी ऐसा कोई काम नहीं किया है जो कोरोना दुम दबाकर भागने लगे। लेकिन,   उत्तराखंड में कोरोना के सरकारी आंकड़ों पर भरोसा करें तो राज्य से महामारी ने भागना शुरू कर दिया है। एक पखवाड़े पहले कोरोना के नए मरीजों के आने का जो आंकड़ा प्रतिदिन दो हजार से अधिक हो गया था, वह अब सिमटकर इसके एक चौथाई से भी कम रह गया है। इससे भी खास बात यह है कि नए मरीजों की तुलना में ठीक होने वालों की संख्या भी दो गुने से अधिक हो गई है। अब इसे जादू कहें या उत्तराखंड सरकार द्वारा कोरोना पर छपवाए गए विज्ञापनों को असर।

हम इसे जादू ही कहेंगे। क्योंकि, उत्तराखंड में जिस तेजी से आंकड़े घट रहे हैं, वह जादू से कम नहीं है। जरा 28 सितंबर और 29 सितंबर के आंकड़ों पर नजर डालें। 29 को नए मरीज आए 493 और ठीक हो गए 1413 यानी तीन गुना से भी अधिक। 28 को 457 नए मरीजों की तुलना में 1184 ठीक हुए। पिछले एक सप्ताह से यही रफ्तार है कोरोना की। अगर आंकड़े ऐसे ही रहे तो हम जल्द ही मई की स्थिति में पहुंच सकते हैं, जब पूरे राज्य में मरीजों का रोजाना का आंकड़ा इकाई में ही होता था। कोरोना की इस स्थिति को देखकर एक बहुत ही प्रेरक गीत याद आ रहा है, जिसमें बापू के लिए कहा गया है कि- दे दी हमें आजादी, बिना खड्ग बिना ढाल। ऐसे ही उत्तराखंड सरकार ने भी बिना वैक्सीन व दवा के ही कोरोना से आजादी दिलाने की ओर कदम बढ़ा दिया है। कोरोना की इस हालत से ही आपको अंदाजा होने लगा होगा कि राज्य कोई काम न होने के बावजूद विकास पर विकास कैसे हो रहा है। बेरोजगारों की भीड़ के बावजूद रोजगार पर रोजगार मिल रहे हैं। जहां घास व तिनकों (पिरुल) से भी बिजली बन रही हो वहां पावर कट पर पावर कट लग रहे हैं। जान लें कि यह ‘त्रिवेंद्र का जादू है मितवा’। देखते हैं कि 17 महीनों बाद जनता कौन सा जादू दिखाती है।

- Advertisement -

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -

Latest article

टिकैत के आंसू क्या राजनीति का टर्निंग प्वाइंट है?

नई दिल्ली। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत के आंसू आज बहस का विषय बन गए हैं। टिकैत रोए क्यों?...

नवम सतत् पर्वतीय विकास शिखर सम्मेलन का उद्घाटन

देहरादून। सतत् पर्वतीय विकास शिखर सम्मेलन के वर्चुचल उद्घाटन सत्र में शुक्रवार को  उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत मुख्य अतिथि एवं...

समीक्षा के बहाने ‘अपने मन की’ करने की तैयारी में त्रिवेंद्र

खराब प्रदर्शन के आधार पर नापसंद मंत्रियों को हटाएंगे और अपनी पसंद के नेताओं को सरकार में लाएंगे

पहले दौर में हुड्‌डा का दांव योगेश्वर दत्त पर भारी

चंडीगढ़। विधानसभा चुनाव के ठीक एक साल बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्‌टर और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा आमने-सामने हैं। बरोदा...

हरियाणा की बेटी ने फतह की उत्तराखंड की सबसे ख़तरनाक चोटी रुदुगैरा

विश्व विख्यात पर्वतारोही अनीता कुंडू ने उत्तराखंड में स्थित रुदुगैरा को फतह कर लिया। उनका ये अभियान प्रधानमंत्री और खेल मंत्री...