Tuesday, December 1, 2020

हाथरस से निकल सकता है कांग्रेस के लिए लखनऊ का रास्ता

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लखनऊ। हाथरस कांड कांग्रेस उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को पुनर्जीवन देने के लिए बड़ा मुद्दा बन सकता है, खासकर सपा और बसपा द्वारा हाल के दिनों में राज्य की योगी सरकार के प्रति दिखाई जा रही ‘सद्भावना’ की वजह कांग्रेस को बढ़त मिल सकती है। हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के प्रति ब्राह्मणों ने खुलकर नाराजगी जाहिर की है। जिस तरह से अब एक दलित बच्ची के साथ हुए दुराचार को लेकर सरकारी मशीनरी ने काम किया है, उससे दलित भी कहीं न कहीं पीड़ा महसूस कर रहे हैं। मुस्लिम कभी भाजपा के साथ थे ही नहीं। ऐसे में अगर कांग्रेस इन तीन वर्गों की आवाज बनती है तो उसको बढ़त मिलना तय है।

लेकिन, कांग्रेस में जिस तरह से अचानक उबाल आता है और वह कुछ ही समय में ठंडा पड़ जाता है, कांग्रेस को इस प्रवृत्ति से उबरना होगा। योगी सरकार की हठधर्मिता और इस मामले को रफा-दफा करने की प्रवृत्ति ने कांग्रेस की राह को आसान कर दिया है। इस मौके को अगर प्रियंका और राहुल एक फुलटाइम राजनेता की तरह लगातार सड़कों पर उठाते हैं तो यह तय है कि राज्य में कांग्रेस की राह बन सकती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू लगातार सक्रियता दिखा रहे हैं, यह राहुल और प्रियंका के लिए अच्छी बात है, क्योंकि कांग्रेस में अधिकांश नेता सड़कों पर उतरने से परहेज करते रहे हैं, जिसके कारण कार्यकर्ता भी घरों से बैठकर ही राजनीति करने लगे थे। कांग्रेस को सबसे अधिक फायदा सपा व बसपा द्वारा पहले जैसी आक्रामकता न दिखाने की वजह से मिल सकता है। दूसरे, मुलायम सिंह यादव के बुजुर्ग होने के बाद अखिलेश तमाम कोशिशों के बावजूद ‘भैयाजी’ ही बने हुए हैं, जबकि जरूरत ‘नेताजी’ की ही है। योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली से भाजपा के भीतर भी कम असंतोष नहीं है। यह भी कांग्रेस के काम आ सकता है। जरूरत बस कांग्रेस को सक्रिय करने भर की है। कांग्रेस को संगठन स्तर पर भी जंग लगे नेताओं को दूर करके ऊर्जावान युवाओं को आगे बढ़ाना होगा। गुरुवार को भी राहुल-प्रियंका के साथ ऐसे नेताओं की भरमार थी जो फोटो खिंचवाने के बाद अपनी-अपनी कारों में एसी की ठंडी हवा में बैठ गए थे। आज कांग्रेस को ठंडी हवा नहीं बल्कि डंडे खाने में सक्षम नेताओं व कार्यकर्ताओं की जरूरत है।  

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