Friday, May 14, 2021

समीक्षा के बहाने ‘अपने मन की’ करने की तैयारी में त्रिवेंद्र

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प्रमुख संवाददाता

देहरादून। उत्तराखंड सरकार के मंत्रियों के कामकाज की मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समीक्षा करने जा रहे हैं। कॉरपोरेट की तर्ज पर सभी मंत्रियों से पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन बनाने के लिए भी कहा गया है। इसके लिए विभागवार शेड्यूल भी जारी हो गया है। मुख्यमंत्री का यह आदेश जारी होते ही राज्य सरकार के महकमों में हड़कंप मच गया है। क्योंकि इस समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ऐसे मंत्रियों को जमकर लताड़ लगाने वाले है, जिन्हें वह मंत्रिमंडल के चुनाव से पूर्व संभावित विस्तार से पहले हटाना चाहते हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार में अभी तीन मंत्रियों की जगह खाली है और इसे भरने के लिए लंबे समय से विस्तार की अटकलें लग रही है। अब विधानसभा चुनाव के लिए लगभग एक साल बाकी रह गया है, ऐसे में मुख्यमंत्री खुलकर खेलना चाहते हैं। सरकार गठन के समय मंत्रिमंडल बनाते समय कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को भी एडजस्ट करना पड़ा था और उस समय त्रिवेंद्र सिंह मुख्यमंत्री पद के लिए अपेक्षाकृत जूनियर थे। लेकिन अब करीब चार साल शासन के बाद अब मुख्यमंत्री को अपनी ताकत का अहसास हो गया है और केंद्र का वरदहस्त होने से उन्हें लगने लगा है कि आगामी चुनाव उनके नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा, इसालिए वह चाहते हैं कि अब सब कुछ उनकी ही मर्जी का हो। इसीलिए छोटी-छोटी बातों का श्रेय लेने से भी मुख्यमंत्री गुरेज नहीं कर रहे हैं और अब वह मंत्रिमंडल में ऐसे साथियों को चाहते हैं, जिन्हें वह अपनी मर्जी से हांक सकें। अभी तक वह जूनियर होने की वजह से वरिष्ठ मंत्रियों को कुछ कह नहीं पाते हैं और जिसे वह कुछ कहते हैं, वह पीछे हटकर चुप बैठ जाता है। इसी वजह से उत्तराखंड में ऐसा लग रहा है मानों एक उपमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक त्रिवेंद्र ही हैं। मदन कौशिक और सतपाल महाराज को छोड़ दें तो किसी भी मंत्री की मौजूदगी का अहसास भी नहीं होता है।

अभी उत्तराखंड भाजपा के वरिष्ठतम मंत्रियों में शुमार हरक सिंह रावत के त्रिवेंद्र ने जिस तरह से पर कतरे हैं, उससे यह भी साफ हो गया है कि उन्हें ऊपर से भी खुलकर खेलने की छूट मिल गई है। मुख्यमंत्री के वार के बावजूद हरक सिंह अभी आह भी नहीं कर पाए हैं, लेकिन उन्होंने 2022 में चुनाव न लड़ने की बात कहकर पूरी भाजपा को चौंका दिया है। ऊपरी तौर हालांकि सबकुछ सामान्य नजर आ रहा है, लेकिन हरक के अगले दांव को लेकर त्रिवेंद्र सिंह चौकन्ने हो गए हैं। समीक्षा बैठक के बहाने वह कुछ मंत्रियों को यह अहसास कराएंगे कि उन पर कार्रवाई की वजह उनकी खराब परफॉर्मेंस है, कोई पूर्वाग्रह नहीं। लेकिन राजनीति में जो भी होता है, उसकी वजह उससे कहीं अलग होती है, जो दिखता है। यह बात अगर त्रिवेंद्र पर लागू होती है तो यही हरक पर भी लागू होगी। इसीलिए उनके चुनाव लड़ने से यह कतई न मानें कि वे चुनावी राजनीति से दूर हो रहे हैं। लेकिन, इतना तय है कि उत्तराखंड में चुनावी वर्ष हंगामेदार होने वाला है। बस दिवाली का इंतजार कीजिए, राजनीति की आतिशबाजी में बारूद भरा जा चुका है, चिंगारी दिखाते ही चमक-दमक और धूम-धड़ाका भी होना तय है।  

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